Navaratri me Garba khelana arthat Dandiya khelana (Hindi)

सारणी –

१. नवरात्रिकी कालावधिमें सूक्ष्म स्तरपर होनेवाली गतिविधियां
२. नवरात्रि व्रतमें पालन करनेयोग्य आचार
३. नवरात्रिकी कालावधिमें उपवास करनेका महत्त्व
४. `जोगवा मांगना’ अर्थात देवीके नामपर भिक्षा मांगना
५. गरबा अर्थात डांडिया नृत्य
६. गराबा खेलते समय होनेवाले अनाचार
७. गरबा खेलते समय होनेवाले अनाचारोंके सूक्ष्म स्तरीय परिणाम
८. देवीकी उपासनास्वरूप परंपरागत गरबा
९. गरबामें तीन बार तालियां बजानेका कारण


।। श्री दुर्गादेव्यै नम: ।।

नवरात्रीमे गरबा खेलना अर्थात डांडिया नृत्य

नवरात्रिकी कालावधिमें सूक्ष्म स्तरपर होनेवाली गतिविधियां

नवरात्रिके नौ दिनोंमें देवीतत्त्व अन्य दिनोंकी तुलनामें एक सहस्र गुना अधिक सक्रिय रहता है । इस कालावधिमें देवीतत्त्वकी अतिसूक्ष्म तरंगें धीरेधीरे क्रियाशील होती हैं और पूरे ब्रह्मांडमें संचारित होती हैं । उस समय ब्रह्मांडमें शक्तिके स्तरपर विद्यमान अनिष्ट शक्तियां नष्ट होती हैं और ब्रह्मांडकी शुद्धि होने लगती है । देवीतत्त्वकी शक्तिका स्तर प्रथम तीन दिनोंमें सगुण-निर्गुण होता है । उसके उपरांत उसमें निर्गुण तत्त्वकी मात्रा बढती है और नवरात्रिके अंतिम दिन इस निर्गुण तत्त्वकी मात्रा सर्वाधिक होती है । निर्गुण स्तरकी शक्तिके साथ सूक्ष्म स्तरपर युद्ध करनेके लिए छठे एवं सातवें पातालकी बलवान आसुरी शक्तियोंको अर्थात मांत्रिकोंको इस युद्ध में प्रत्यक्ष सहभागी होना पडता है । उस समय ये शक्तियां उनके पूरे सामर्थ्यके साथ युद्ध करती हैं ।

नवरात्रि व्रतमें पालन करनेयोग्य आचार

नवरात्रि व्रतका अधिकाधिक लाभ प्राप्त होनेके लिए शास्त्रमें बताए आचारोंका पालन करना आवश्यक होता है । परंतु देश-काल-परिस्थितिनुसार सभी आचारोंका पालन करना संभव नहीं होता । इसीलिए जो संभव हो, उन आचारोंका पालन अवश्य करें । जैसे
१. पादत्राण न पहनना
२. अनावश्यक न बोलना
३. धूम्रपान न करना
४. पलंग अथवा गद्दीपर न सोना
५. दिनके समय न सोना
६. ब्रह्मचर्यका पालन करना
७. गांवकी सीमाको न लांघना इत्यादि
नवरात्रिमें मांसाहार सेवन और मद्यपान भी नही करना चाहिए । साथही रज-तम गुण बढानेवाला आचरण, जैसे चित्रपट देखना, चित्रपट संगीत सुनना इत्यादि त्यागना चाहिए ।

नवरात्रिकी कालावधिमें उपवास करनेका महत्त्व

नवरात्रिके नौ दिनोंमें अधिकांश उपासक उपवास करते हैं । नौ दिन उपवास करना संभव न हो, तो प्रथम दिन एवं अष्टमीके दिन उपवास अवश्य करते हैं । उपवास करनेसे व्यक्तिके देहमें रज-तमकी मात्रा घटती है और देहकी सात्त्विकतामें वृद्धि होती है । ऐसा सात्त्विक देह वातावरणमें कार्यरत शक्तितत्त्वको अधिक मात्रामें ठाहण करनेके लिए सक्षम बनता है ।

देवी उपासनाके अन्य अंगोंके साथ नवरात्रीकी कालावधिमें `श्री दुर्गादेव्यै नम: ।’ यह नामजप अधिकाधिक करनेसे देवीतत्त्वका लाभ मिलनेमें सहायता होती है ।    

नवरात्रिमें विविध तिथियोंपर की जानेवाली धार्मिक कृतियां इस नामजपके साथ पूरे श्रद्धाभावसहित करनेेसे पूजक एवं परिवारके सभी सदस्योंको शक्तितत्त्वका लाभ होता है । नवरात्रिकी कालावधिमें शक्तितत्त्वसे भारित बनी वास्तुद्वारा वर्षभर इन तरंगोंका लाभ मिलता रहता है । यह लाभ निरंतर प्राप्त होनेके लिए वर्षभर भावसहित उपासना, नामजप इत्यादि करना आवश्यक होता है ।

`जोगवा मांगना’ अर्थात देवीके नामपर भिक्षा मांगना  

`जोगवा’ मांगनेका अर्थ है, देवीको अंतर्मनसे प्रार्थना कर कार्य करनेके लिए जागृत करना । यह देवीके चरणोंमें आर्ततासे की गई याचना है । इससे जोगवा मांगनेवालेका अहं देवीके चरणोंमें लीन होता है ।

यह दास्यभक्तिका प्रकार है । देवीके चरणोंकी दासी बननेके लिए पांच घरोंसे `शिधा’ अर्थात कच्चे अन्न सामग्राकी भिक्षा मांगते हैं । भिक्षामें जो मिलता है, उसीसे व्यंजन बनाकर प्रसादके रूपमें सेवन करते हैं । इस कृतिद्वारा अपना अहं घटाकर स्वयंमें वैराग्यभावकी निर्मिति करना ही जोगवा मांगनेका खरा अर्थ है ।

गरबा अर्थात डांडिया नृत्य

नवरात्रिमें विभिन्न प्रांतोंमें किए जानेवाले धार्मिक कार्यक्रमों का एक महत्त्वपूर्ण विधि है, गरबा । नवरात्रों में गुजरात में मातृशक्ति के प्रतीक अनेक छिद्रों वाले मिट्टी के कलश में रखे दीपक का पूजन करते हैं । यह `दीपगर्भ’ स्त्री की सृजनशक्ति का प्रतीक है । इस मान्यतासे नौ दिन `दीपगर्भ’ पूजा जाता   है । `दीपगर्भ’से `दीप’ शब्द का लोप होकर गर्भ-गरभो-गरबो अथवा गरबा शब्द प्रचलित हुआ ।

गराबा खेलते समय होनेवाले अनाचार

आजकल गरबा नृत्यमें मांकी स्तुतिवाले गीत न होकर हीन एवं अभिरुचिहीन गीतोंपर भद्दा नृत्य किया जाता है । उच्च स्वरोंमें गाए जानेवाले फूहड गाने एवं तीखे वाद्यवृंद ध्वनिप्रदूषण बढ़ाते हैं । मूलत: एक धार्मिक उत्सवके रूपमें मनाए जानेवाले इस कार्यक्रमको व्यायसायिक रूप प्राप्त हुआ है । इन कार्यक्रमोंमें असभ्य वर्तन भी दिखाई देता है ।

क्या धार्मिक विधिमें इस प्रकार गरबा खेलनेसे देवीमांकी कृपा हमपर हो सकती है ?

गरबा खेलते समय होनेवाले अनाचारोंके सूक्ष्म स्तरीय परिणाम

अनुचित रूपसे गरबा खेलते समय बढे रज-तमके कारण उस स्थानपर कष्टदायक तरंगें अधिक मात्रामें आकृष्ट होती हैं । अनिष्ट शक्तियां काली शक्ति प्रक्षेपित करती हैं । इस काली शक्तिका वहां उपस्थित व्यक्तियोंपर न्यूनाधिक मात्रामें परिणाम होता है । परिणामस्वरूप व्यक्ति बहिर्मुख और विषयोंके आधीन होता है ।

गरबा खेलते समय की जानेवाली कुछ अनुचित कृतियां एवं काली शक्तिकी मात्रा  
१. मद्यपान कर गरबा खेलनेसे २० प्रतिशत काली शक्ति प्रक्षेपित होती है । 
२. पादत्राण पहनकर गरबा खेलनेसे १० प्रतिशत
३. चलचित्रोंके गीतोंकी धुनपर गरबा खेलनेसे २० प्रतिशत
४. गाना गाते हुए स्वयं गरबा खेलनेसे २० प्रतिशत
५. आधुनिक तंत्रज्ञानके आधारपर भजन गानेसे २० प्रतिशत एवं
६. अन्य कृतियांेसे १० प्रतिशत काली प्रक्षेपित होती है ।
इसका कुल योग होता है १०० प्रतिशत । इससे स्पष्ट होता है की, अनुचित प्रकारसे गरबा खेलनेसे हानिही होती है ।

देवीकी उपासनास्वरूप परंपरागत गरबा

जब हम उत्कट भावसे देवताका आदर-सम्मान करेंगे, तभी उनकी कृपा प्राप्त कर पाएंगे । गरबा नृत्यमें होनेवाले अनाचारों जैसे कृत्योंसे नहीं, भावपूर्ण पूजनसे भक्तपर देवीमांकी पूर्ण कृपा होती है । इसीलिए गरबा खेलनेको हिंदु धर्ममें देवीकी उपासना मानते हैं । इसमें देवीका भक्तिरसपूर्ण गुणगान करते हैं ।

इस समय देवीके समक्ष पारंपरिक भावपूर्ण नृत्यके साथ तालियों एवं छोटे-छोटे डंडोंसे लयबद्ध ध्वनि भी करते हैं । मूल पारंपरिक गरबा नृत्यमें तीन तालियां बजाई जाती हैं । पहली ताली नीचे झुककर, दूसरी ताली खडे होकर और तीसरी ताली हाथ ऊपर उठाकर बजाई जाती है ।

इस समय देवीके समक्ष पारंपरिक भावपूर्ण नृत्य किया जाता हैं । नृत्यमे प्रत्येक स्तरपर तीन तालियां बजायी जाती है । एवं छोटे छोटे डंडोसे लयबद्ध ध्वनि भी करते हैं । गरबा खेलते समय गोल घेरा बनाते हैं । साथही देवीके गीत अथवा भजन गाते हैं ।

इस प्रकार तालियां बजाकर भजन एवं नृत्य करना एक प्रकारसे सगुण उपासना ही है । इस उपासना पद्धतिमें तालियोंके नादसे श्री दुर्गादेवीको जागृत करते हैं । और ब्रह्मांडमें कार्य करनेके लिए मारक रूप धारण करनेके लिए आवाहन करते हैं ।

गरबामें तीन बार तालियां बजानेका कारण

नवरात्रिमें देवीका मारक तत्त्व चंद्रकलासमान बढती मात्रामें जागृत होता जाता है । परमेश्वरकी ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश ये तीन प्रमुख कलाएं हैं । देवीका मारक रूप इन तीनों स्तरोंपर जागृत होनेके लिए गरबा खेलते समय तीन तालियां बजाते हैं । तीन तालियां बजानेेसे ब्रह्मांडमें विद्यमान देवीकी संकल्पशक्ति कार्यरत होती है । इसलिए तीन तालियोंकी लयबद्ध क्रियाकलपोंद्वारा देवीका गुणगान करना अधिक इष्ट एवं फलदायी होता है ।
गरबा खेलतेसमय होनेवाले अनुचित प्रकार एवं अनाचारकी रोखथाम करना ही आजके समयमें देवीमांकी खरी उपासना होगी ।

इसके लिए देवीमां हमें बुद्धि एवं शक्ति प्रदान करें, यही उसके चरणोंमें प्रार्थना ।

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